अमृता अजमोदा चूर्ण
अमृता अजमोदा चूर्ण
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सामग्री :
अजमोदा, विदंग, सैंधव लवण (सेंधा नमक), देवदारु, चित्रक, पिप्पलीमुला, मिश्रेय, पिप्पली, मारीच, हरीतकी, वृद्धदारु और शुंथि।
के बारे में :
अमृता अजमोदा चूर्ण का उपयोग रूमेटाइड अर्थराइटिस, साइटिका, पीठ दर्द और कफ विकारों के उपचार में किया जाता है। यह सूजन को कम करके जोड़ों को ठीक करता है और हड्डी और आसपास के मांसपेशियों के ऊतकों को स्वस्थ बनाता है।
आयुर्वेद में इसे सबसे अच्छी "आमपचक" (विषाक्तता दूर करने वाली) औषधियों में से एक माना जाता है। इसलिए, यह भूख भी बढ़ाती है, पाचन में सुधार करती है और पेट में गैस बनना कम करती है।
फ़ायदे :
a) इसमें वातहर गुण होता है जिसके कारण यह शरीर के अंदर वात को कम करता है
ख) जोड़ों की सूजन कम करता है और गतिशीलता में सुधार करता है।
ग) यह गठिया, साइटिका, तंत्रिका संबंधी दर्द आदि सूजन संबंधी दर्दनाक स्थितियों में राहत देता है।
d) यह जोड़ों के विकारों और पीठ दर्द से जुड़ी जकड़न और दर्द को कम करता है।
उपयोग/खुराक कैसे करें:
5-10 ग्राम चूर्ण को घी या गर्म पानी के साथ दिन में दो बार या चिकित्सक के निर्देशानुसार सेवन करें।
सावधानियां :
क) उपयोग से पहले लेबल को ध्यान से पढ़ें
ख) ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सूरज की रोशनी से दूर रखें
ग) बच्चों की पहुंच से दूर रखें
d) अनुशंसित खुराक से अधिक न लें
ई) गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और चिकित्सा स्थितियों वाले लोगों को उपयोग से पहले एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना चाहिए
